महफ़ूज़ रिश्ते
रिश्ते की समझ हमेशा ही थी हम में,
ना पुराने रिश्ते तोड़े, ना नये रिश्ते छोड़े,
हॉं एक बात वक़्त की चोट खाकर
थोड़ा सँभल गए हम
उसको लोगों ने सोचा,कितना बदल गए हम,
रिश्तों की होड़ में, सबसे पीछे खड़े थे हम,
दिल से जिसने अपनाया, उसी के हो गए हम,
कभी भी मतलब से ना तब रिश्ते बनाए जब ज़रूरत थी हमें,
कोशिश तो यही रहेगी मतलब के लिये रिश्ते ना आज बनाए हम,
शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने अपनाया हमें,
शुक्रिया उनका भी, जिसने बदनाम किया हमें,
बदनामी भी उन्हीं की होती,
जिसमें कुछ बात है होती,
नहीं तो ईश्वर ने तक़दीर की लाइन ना बनायी होती,
वक़्त भी मेहरबाँ है-
अकेले में भी मुस्कुरा लेते हैं हम,
मन किया तो चार अॉंसू बहा लेते,
ए इन्सॉ रिश्तों को समझ,
घमंड में ना झूम तू,
ए इंसान आज भी सँभल जा,
किसी को बदनाम करने से पहले,
एक रिश्ते की डोर में बंध जा,
रिश्ते की डोर में बंध जा