रोटी

चल पड़े थे देखो जनाब कमाने रोटियाँ

पैर में थे जूते , सिर पर थी टोपियाँ

क्या बात है इस रोटी में ,

हर कोई दौड़ रहा है ,

इसको घर लाने में ,

लोग पापड़ हैं बेलते ,

कितनी मुसीबतें और कष्ट हैं झेलते ,

अब रोटी ने भी फ़ुरसत तो जो पायी

खाते हैं बच्चे पिज़्ज़ा , बर्गर और रसमलाई

माँओं ने बड़ी मुश्किल से सम्भाला था बच्चों को

ये आ गया करोना बैठ गया घरों में

ना जाने देता किसी को

वो खुद भी बैठ गया है पसर

के घरों में

अब बारी है इसकी आयी

भागो करोना शामत तुम्हारी आयी

हमने भी ठान लिया है भगायेंगे तुमको

पहनेंगे मास्क मुँह पर

हाथों पर लगाएँगे सेने टाइज़र

ले डंडा दौड़ाएँगे तुम्हें आज

ईश्वर से दुआ हैं करते

जल्दी से ख़ुशहाली है आए

लोग भी जीवन निडरता से बिताएँ

इसी उम्मीद के साथ रोकते हैं कलम अपनी

सब ख़ुश रहें ध्यान रखें सेहत का अपनी

जय सिया राम